120 Bahadur Film Review: 1962 के रेजांग ला के साहबों को श्रद्धांजलि 1962 का रेजांग ला युद्ध, जो भारत के इतिहास की किताबों में लिखा गया, आज भी साहस और देशभक्ति की सबसे बड़ी मिसाल है। इस युद्ध में 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 120 भारतीय सैनिकों ने 3,000 चीनी सैनिकों के खिलाफ ऐसी वीरगाथा लिखी, जो सदियों तक याद रहेगी।

120 Bahadur Film Review: 1962 के रेजांग ला के साहबों को श्रद्धांजलि 1962 का रेजांग ला युद्ध, जो भारत के इतिहास की किताबों में लिखा गया, आज भी साहस और देशभक्ति की सबसे बड़ी मिसाल है। इस युद्ध में 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 120 भारतीय सैनिकों ने 3,000 चीनी सैनिकों के खिलाफ ऐसी वीरगाथा लिखी, जो सदियों तक याद रहेगी।

120 bahadur movie review

निर्देशक रजनीश घई ने 120 बहादुर नामक फिल्म बनाई है, जिसमें फरहान अख्तर ने मेजर शैतान सिंह भाटी की भूमिका निभाई है। चार साल बाद फिल्मों में फिर से आने वाले फरहान ने एक नए रूप में दिखाई दीिए हैं, और कह सकते हैं कि यह “वापसी” बहुत अच्छी है। 21 नवंबर 2025 को रिलीज हुई फिल्म ने देश भर में उत्कृष्ट प्रतिक्रिया दी है। दर्शक कहानी और सैनिकों के बलिदान और देशभक्ति की हर भावना से जुड़ सकते हैं। –

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फ़िल्म को मिली रेटिंग: 4/5 हिंदी: जॉनर: इतिहासिक युद्ध ड्रामा टाइम: 137 मिनट प्रमुख कलाकार: साहब अख्तर योगी खन्ना विवन भटेना प्रकाशित सिवाच निर्माता: राजन घई गीत: सलीम-सुलेमान —– भारतीय कहानी: 120 सैनिक वीरता का दस्तावेज फिल्म की कहानी 1962 के भारत-चीन युद्ध पर है। रेजांग ला की पोस्ट पर केवल 120 भारतीय सैनिक थे, जिनका नेतृत्व मेजर शैतान सिंह भाटी (PVC) कर रहे थे, जिन्हें वीरता के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। इन वीर सैनिकों के सामने 3,000 से अधिक चीनी सैनिकों की सेना थी।

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फिल्म बॉर्डर, केसरी और शेरशाह की याद दिलाती है। यहां हर किरदार की पृष्ठभूमि ठीक वैसी ही है जैसे “बॉर्डर” में सैनिकों की व्यक्तिगत कहानियां हैं। वहीं, 120 सैनिकों द्वारा हजारों शत्रुओं से लड़ने का उत्साह भी दिखाई देता है। युद्ध के दृश्य दिल को झकझोर देते हैं और दर्शक हर सीन से जुड़े हुए महसूस करते हैं। —– 🎭 प्रदर्शन: मेजर शैतान सिंह के रूप में फरहान अख्तर फिल्म में फरहान अख्तर की एक्टिंग सबसे बड़ी ताकत है। फिल्म के शुरूआती हिस्से में वे एक शांत, विनम्र और सैनिकों के प्रति स्नेहपूर्ण अधिकारी दिखते हैं।

उनके कई संवाद बहुत भावुक हैं। फरहान का रूप फिल्म के दूसरे भाग में बदल जाता—उनकी तेज आंखें, निर्णय लेने की क्षमता और आवाज उन्हें एक प्रभावशाली लीडर के रूप में दिखाती हैं। उनके एक संवाद से दर्शक उत्साहित हो जाता है: आज धरती शोक कर रही है…। दुश्मन के खून से भर दो उसे!” साथ ही राशी खन्ना ने अपने किरदार के भावों को बेहतरीन ढंग से निभाया है। विवान भटेना और अंकित सिवाच जैसे कलाकारों ने फिल्म को बेहतरीन बनाया है। —– निर्देश: रजनीश घई की उत्कृष्ट प्रस्तुति ऐसी महत्वपूर्ण फिल्मों में संतुलन बनाए रखना कठिन है—इनमें कहानी, तथ्य, भावनाएं और युद्ध का वास्तविक चित्रण मिलना चाहिए।

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रजनीश घई इस चुनौती पर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। सैनिकों के घरों और उनके परिवारों की व्यथा, विपरीत मौसम और बर्फीले मौसम में वास्तविकता, वास्तविक युद्ध रणनीति और तैयारी का चित्रण—सब कुछ बहुत सोच-समझकर प्रस्तुत किया गया है। फिल्म का कलाइमेक्स २० मिनट लंबा है और वही इसकी जान है। दर्शक इस दौरान अपनी सीट पर बैठे रहते हैं और कई बार आंखें नम कर देते हैं। —– 🎶 संगीत और स्कोर सलीम-सुलेमान की जोड़ी ने हमेशा की तरह सफलता हासिल की है। युद्ध से पहले बजने वाले देशभक्ति के संगीत और फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर दर्शकों को प्रेरित करते हैं। लेकिन गीतों में भावनाएं हैं, फिल्म म्यूजिक-केंद्रित नहीं लगती, जो एक वॉर फिल्म के लिए सही है।

फिल्म का प्रमुख आकर्षण बिंदु का प्रभाव 🇮🇳 ऐतिहासिक सत्य पर आधारित भावनात्मक और तथ्यात्मक प्रस्तुति 🔥 20 मिनट का क्लाइमेक्स दर्शकों को बांधे रखता है। 🎭 फरहान की ऐक्टिंग फिल्म की रीढ़ है। ❄️ लोकेशन और सिनेमेटोग्राफी युद्ध का वास्तविक अनुभव 🎵 पावरफुल स्कोर जोश भर देता है। —– किस वजह से आपको फिल्म देखनी चाहिए? यह सिर्फ एक युद्धकथा नहीं है; यह भारतीय सेना के साहस, नेतृत्व और बलिदान की मिसाल है। यह फिल्म इतिहास जानने वालों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

फरहान अख्तर के करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, परिवार के साथ इस प्रेरणादायक कहानी को देखना चाहिए। —– फिल्म के कमजोर पक्ष: कुछ स्थानों पर गति धीमी लगती है। युद्ध की रणनीति और व्यापक हो सकती थी। स्क्रीन समय और कुछ पात्र मिल सकते थे। फिल्म कुछ कमजोरियों के बावजूद बहुत प्रभावशाली है और दिल में गर्व भर देती है। —– अंतिम निर्णय: देखना होगा! ‘120 बहादुर’ एक फिल्म नहीं है; यह एक भावनात्मक श्रद्धांजलि है उन 120 वीरों को, जिन्होंने अपना जीवन देश के लिए न्यौछावर कर दिया।
यह फिल्म हर भारतीय को देखनी चाहिए, ताकि अगली पीढ़ियां बहादुरी का असली अर्थ समझ सकें। हम सो रहे हैं क्योंकि वे जाग रहे हैं…। वे मरते हैं, हम जीते हैं। रिव्यू रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5) निष्कर्ष: यह फिल्म आपको देशभक्ति से भर देगी।

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