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9 feb 2026 valentine week day:- वैलेंटाइन वीक 2026: 9 फरवरी के दिन को खास कैसे बनाएं

9 feb 2026 valentine week day:- Valentine Week har saal 7 February se start hota hai aur 14 February tak chalta hai.

9 feb 2026 valentine week day

9 feb 2026 valentine week day:- Valentine week day हर साल 7 फरवरी को शुरू होता है और 14 फरवरी तक चलता है। इस पूरा सप्ताह तो प्यार, रिश्ता को अच्छा बनाने के लिए जाना जाते है। या रोज डे से शुरुआत होता है रोज अलग अलग से  propose day, chocolate day, teddy day, promise day, hug day, kiss day, रोज अलग अलग डे आता है।

9 feb 2026 valentine week day! 9 फरवरी 2026 को कौन सा डे है?

9 फरवरी को चॉकलेट डे है ये प्यार की मिठास का खास दिन है, ये तारीख को हर साल चॉकलेट डे मनाया जाता है। ये दिन अधिक से अधिक उन लोगों के लिए है, जो आपने रिश्ता को मिठास घोलने चाहता है।

Best chocolate day wishes 2026-दिल से मिटी शुभकामनाएं हैं

9 feb 2026 valentine week day

2026 का चॉकलेट डे  आपका जीवन के प्यार , और खुशियां और बहुत सारी मिठास लेकर आए। जैसे चॉकलेट का हर टुकड़ा दिल को सुकून देता है ठीक वैसे ही आपके रिश्ता भी खास बनता है।

Nta neet:- nta neet 2026: आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियाँ

Nta neet:- NTA NEET क्या है?

Nta neet! नित का पूरा नाम नेशनल क्लीगिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट है। यह एक तरफ से देखा जाए तो भारत के मेडिकल कोर्स होने वाला राष्ट्रीय स्तर परीक्षा है। Nta neet

nta neet :- नेट परीक्षा का उद्देश्य क्या है?

Nta neet

Nta neet! पहले तो नित एडमिशन के अलग अलग राज्यों और कॉलेजों की अलग परीक्षा होता था इसलिए छात्रों को बहुत परेशान होता था, क्योंकि बहुत जगह फॉर्म भरना पड़ता था और खर्चा भी बहुत होता था।

nta neet

एग्जाम निकलने वाला इंपोर्टन डेट ।

हर साल नेता नित एग्जाम इस तारीख निकलता है

आवेदन फॉर्म : जनवरी-फरवारी

एडमिट कार्ड: अप्रैल

परीक्षा: माई

रिज़ल्ट: जून

काउंसलिंग: जुलाई से शुरु

Isl league:- ISL लीग में सफलता के लिए रणनीतियाँ: एक गहन विश्लेषण

Isl league:- भारत में क्रिकेट के बाद अब फुटबॉल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है!

Isl league

भारत में क्रिकेट तो बहुत सालों से लोगों पर छाया हुआ है, और अब फुटबॉल भी तेजी से अपना पहचान बना रहा है। खासकर देखेंगे तो फुटबॉल का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है।

Isl league:- स्टेडियम में बढ़ती भीड़ और सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग मैच इसका सबूत हैं।

स्टेडियम में लगातार भीड़ बढ़ती जा  रही है और या सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग मैच अच्छा सबूत है। हर कोई चौके छक्के पर सुनते ही सभी लोग तालिया और हर विकेट पर उठता शोर इस जुनून को और भी खास बना देता है।

Isl league! ISL ने भारतीय फुटबॉल को नई पहचान दी है।

अगर आप का डेट में फुटबॉल की बात करे तो, इंडिया सुपर लीग का नाम जरूर जोड़ेगा। इस ने न ही सिर्फ खिलाड़ियों को बड़ा मैच दिया, जबकि भारतीय फुटबॉल को एक नई ऊर्जा और पहचान भी दिया है।

Cricbuzz: क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक सबसे बड़ा महत्वपूर्ण सम्पूर्ण गाइड

Cricbuzz:- “अगर आप क्रिकेट के दीवाने हैं और हर गेंद का अपडेट जानना चाहते हैं…”

Cricbuzz

Cricbuzz:- क्रिकेट यह सिर्फ खेल ही नहीं है। Cricbuzz क्रिकेट वह खेल है जो सबलोग का दिल में राज करता है, बल्कि ये एक जुनून है। और वो ऐसे इहसास है जो हमे आखिरी ओवर तक देखने के लिए बंधे रहते है।

Cricbuzz! क्रिकेट मैच देखने के लिए जरूरी ऐप्स और हर ईशान के फोन में होना चाहिए?

अगर आप Cricbuzz क्रिकेट मैच देखना चाहते है, तो ये ऐप जरूर होना चाहिए आपका फोन में अगर आप Cricbuzz मैच मिस नहीं करना चाहते है, तो ये लाइव स्ट्रीमिंग ऐप आपके लिए सबसे बेस्ट है। हाई क्वालिटी वीडियो ,रिप्ले और हैलेट्र के साथ आप पूरी मैच देख सकते है और पूरा मजा ले सकते है।

Cricbuzz क्या है? Cricbuzz

Cricbuzz

Cricbuzz हर क्रिकेट का फैन डिजिटल साथी है, cricbuzz या एक लोकप्रिय क्रिकेट वेबसाइट और मोबाइल ऐप है, जैसे आपको लाइव स्कोर, मैच शेत्युल, टीम रैंकिंग और खिलाड़ियों का भी पूरी जानकारी मिलती है। Cricbuzz

2026 movie :- 2026 में रिलीज होने वाली प्रमुख फिल्में: दर्शकों के लिए क्या खास है?

2026 movie:- 2026 का फिल्मी साल कैसा रहा?

2026 movie

2026 movie:- 2026 की फिल्मी बहुत धमाका डर्मा और डिजिटल का जलवा है! इस साल सिर्फ फिल्मों में ही नहीं बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी नहीं कि, जबकि कंटेंट और तकनीक के मामले में भी नया इतिहास रचा।

2026 movie! कौन-कौन सी बड़ी फिल्में आने वाली हैं?

सिनेमा प्रेमियों के लिए 2026 बेहद खास रहने वाला फिल्म है। ये फिल्म में एक्शन, डर्मा रोमांस तिल से भरपूर कई और फिल्म भी रिलीज़ होने वाले है।

क्या कोई सुपरहिट सीक्वल आने वाला है?

2026 movie

इस साल 2026 फिल्मों के प्रेमियों के लिए इस साल बड़ा साबित होने वाला है। इस साल बड़ा बड़ा ब्लॉकबस्टर फिल्मों के सीक्वल पार्ट/2  पार्ट/3 रिलीज होने वाला है, जिन्हें देखकर रील देखने वाला फिर से रोमांच सिनेमा हॉल में जाएगा देखने के लिए।

जैसे

. Drishyam 3

. Border 2

. Mardaani 2

. Dhurandhar 2

. Awarapan 2

. Pati patni aur woh do

Kal kaun sa day hai:- कल कौन सा दिन है: जानें महत्वपूर्ण तिथियों और त्योहारों के बारे में

Kal kaun sa day hai :- कल कौन सा दिन है जानिए?

Kal kaun sa day hai

कल तो वासे रविवार है कल सभी लोगों को आराम करने के लिए दिन है लेकिन कल के लिए बहुत अच्छा दिन है !

वैसे कल क्या है?

Kal kaun sa day hai!  कल बहुत खास दिन है जो की सभी लोग इंतजार में रहता है कल तारीख 8 February 2026 दिन रविवार की दिन है कल का दिन सभी लोग इंतजार में रहता है !

कल वैसे तो रविवार का दिन है कल सभी लोग सप्ताह बार का आराम करेगा इस लिए छुट्टी दिया जाता है!

लेकिन कल हैप्पी प्रपोज डे भी है !

Kal kaun sa day hai

ये जानकारी सभी लोग तक पहुंचने के लिए कोशिश करेंगे अधिक से अधिक शेयर, स्टोरी, ग्रुप में डाले ताकि सभी लोग को पता चले

धन्यवाद

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  Amit Shah – की ललकार के बीच विपक्ष का वॉकआउट: चुनाव सुधारों पर संसद में मचा सियासी तूफ़ान!

Amit shah

भारतीय संसद के शीतकालीन सत्र में बुधवार का दिन राजनीति के सबसे रोमांचक और विवादित दिनों में से एक बन गया। लोकसभा में चुनाव सुधारों, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR), EVM बनाम बैलेट पेपर, और चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर चल रही बहस अचानक और अधिक तीखी हो उठी, जब गृह मंत्री अमित शाह अपने जवाब देने खड़े हुए। उनके भाषण के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया और देखते ही देखते पूरा विपक्ष सदन से वॉकआउट कर गया।

Amit shah-    इस घटनाक्रम ने भारतीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है—क्या विपक्ष बहस से बच रहा है? या फिर क्या सरकार सवालों का जवाब देने से बच रही है?
आज का यह विस्तृत लेख इन सभी मुद्दों को गहराई से समझाता है।

चुनाव सुधार: क्यों बना संसद का सबसे गर्म मुद्दा?

Amit shah-  भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनाव सुधार समय-समय पर बेहद महत्वपूर्ण विषय बनते रहे हैं। लेकिन इस बार यह मुद्दा इतना गरमाया कि विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों आमने-सामने आ गए।
लोकसभा में ज्यादातर विपक्षी सांसदों ने कहा कि—

बैलेट पेपर की वापसी हो

EVM पर पूर्ण जांच हो

चुनाव आयोग को स्वतंत्र बनाया जाए

SIR प्रक्रिया में छेड़छाड़ न की जाए

वहीं सत्ता पक्ष का कहना था कि चुनाव सुधारों का उद्देश्य केवल पारदर्शिता बढ़ाना है, न कि चुनाव प्रक्रिया पर किसी प्रकार का संदेह पैदा करना।

EVM बनाम बैलेट पेपर: सदन में सबसे बड़ा टकराव

विपक्ष ने लोकसभा में स्पष्ट कहा कि EVM पर भरोसा कम होता जा रहा है, इसलिए बैलेट पेपर को वापस लाना चाहिए।
उनका तर्क था—

EVM मशीनें हैक की जा सकती हैं

कई देशों ने बैलेट पेपर की वापसी की है

जनता के बीच भ्रम फैला है

चुनाव आयोग विश्वास खोता जा रहा है

वहीं सत्ता पक्ष ने जवाब दिया—

EVM दुनिया की सबसे सुरक्षित मतदान प्रणाली है

बैलेट पेपर में बूथ कैप्चरिंग और धांधली ज्यादा होती थी

EVM ने चुनाव को तेज और पारदर्शी बनाया है

रविशंकर प्रसाद ने कहा—

> “कांग्रेस जब जीतती है तो EVM ठीक, जब हारती है तो EVM खराब!”

—का

    Amit shah- बड़ा हमला: ‘वोटर लिस्ट नई हो या पुरानी, आपकी हार तय है!’

जब अमित शाह सदन में जवाब देने खड़े हुए, तो उनके पहले ही वाक्य में विवाद पैदा हो गया। उन्होंने कहा—

> “मतदाता सूची पुरानी हो या नई, आपकी हार पक्की है। जनता आपके साथ नहीं है, यह असली समस्या है।”

यह बयान सुनते ही विपक्ष भड़क उठा। राहुल गांधी खड़े होकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाने लगे। सत्ता पक्ष की सीटों से विरोध के स्वर उठे और हंगामा शुरू हो गया।

लेकिन अमित शाह ने अपने भाषण में कुछ बेहद अहम बिंदुओं को स्पष्ट किया—

SIR क्यों जरूरी है?

उनके अनुसार SIR (Special Intensive Revision) का उद्देश्य है—

मृत व्यक्तियों के नाम हटाना

फर्जी वोटर हटाना

अवैध घुसपैठियों के नाम निकालना

नए पात्र मतदाताओं को सूची में जोड़ना

उन्होंने कहा कि SIR पूरी तरह चुनाव आयोग की प्रक्रिया है। संसद दिशा दे सकती है, लेकिन आदेश नहीं दे सकती।

विपक्ष का वॉकआउट: रणनीति या मजबूरी?

राहुल गांधी के सवालों के बाद सदन में इतना शोर हो गया कि विपक्षी दलों ने सामूहिक रूप से वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष का कहना था कि—

उनकी आवाज दबाई जा रही है

सरकार जवाब देने को तैयार नहीं

चुनाव आयोग सरकार के प्रभाव में है

वहीं बीजेपी ने कहा—

> “विपक्ष बहस से भाग रहा है, इसलिए डिबेट के बीच में भाग खड़ा हुआ।”

CJI को चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया से क्यों हटाया गया?

यह बहस का सबसे बड़ा संवैधानिक मुद्दा रहा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि—

CJI को हटाकर सरकार ने चुनाव आयोग पर नियंत्रण बढ़ा लिया है

नई प्रणाली निष्पक्ष नहीं है

लेकिन अमित शाह ने विस्तार से इसका जवाब दिया।

1950 से 1989 तक का इतिहास

उन्होंने कहा—

73 वर्षों तक चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कोई कानून ही नहीं था

प्रधानमंत्री सिर्फ फाइल भेजते थे, राष्ट्रपति नोटिफिकेशन जारी कर देते थे

किसी को तब कोई दिक्कत नहीं होती थी

1989 के बाद बदलाव

जब सरकार और चुनाव आयुक्त के बीच विवाद हुआ, तब नए नियम बनाए गए।
फिर मामला सुप्रीम कोर्ट गया, जिसने कहा—

> “नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए।”

फिर 2023 में कानून बना

केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर दिया, जिसमें चयन समिति होगी—

प्रधानमंत्री

नेता प्रतिपक्ष

प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक मंत्री

CJI को इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि—

वह कार्यपालिका का हिस्सा नहीं

नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा बनना न्यायपालिका की भूमिका से बाहर कहा गया

अमित शाह ने कहा—

> “जब प्रधानमंत्री सीधे नियुक्ति करते थे, तब किसी ने सवाल नहीं उठाए। अब पारदर्शिता की प्रक्रिया बनाई तो आपत्ति हो रही है!”

हरसिमरत कौर बादल का बड़ा बयान: ‘सभी पार्टियाँ चुनाव में झूठ बोलती हैं’

बहस के दौरान शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने दोनों पक्षों को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा—

चुनाव के दौरान पार्टियाँ झूठे वादे करती हैं

AAP कहती है हर महिला को 1000 रुपये देगी

कांग्रेस कहती है हर किसी को नौकरी देंगे

लेकिन उन्हें पता होता है कि यह सब संभव नहीं

उनके भाषण ने सदन में हलचल मचा दी।

राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर महाबहस

जब लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हंगामा हो रहा था, उसी समय राज्यसभा में भी जोरदार बहस चल रही थी।
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का कहना था कि—

वंदे मातरम् राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक है

इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए

वहीं विपक्ष ने कहा कि इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषण: इस वॉकआउट का चुनावी असर क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि—

1. विपक्ष EVM को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाएगा

यह मुद्दा 2026 और 2029 के चुनाव तक चलेगा।

2. बीजेपी SIR और घुसपैठियों पर फोकस करेगी

यह मुद्दा खासकर सीमावर्ती राज्यों में बड़ा असर करेगा।

3. चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया अगला बड़ा राजनीतिक विवाद बनेगी

यह विषय अब अदालत और मीडिया दोनों में प्रमुख रहेगा।

इस बहस का लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

लोकतंत्र तब ही मजबूत होता है जब—

बहस पूरी हो

आंकड़े सामने रखे जाएँ

तर्क दिए जाएँ

विपक्ष और सरकार दोनों अपने पक्ष रखें

लेकिन जब सदन हंगामे का अखाड़ा बन जाए और वॉकआउट आम हो जाए, तो—

जनता वास्तविक मुद्दों से दूर हो जाती है

सुधार प्रक्रिया धीमी हो जाती है

बहस की जगह आरोप-प्रत्यारोप ले लेते हैं

निष्कर्ष: संसद का एक दिन, जिसने कई सवाल छोड़ दिए

अमित शाह का भाषण, विपक्ष का वॉकआउट, चुनाव सुधारों पर तीखी बहस…
यह सब मिलकर संकेत देता है कि भारतीय राजनीति आने वाले महीनों में और अधिक गरमाने वाली है।

सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—

क्या EVM पर बहस जारी रहेगी?

क्या SIR प्रक्रिया चुनावों को प्रभावित करेगी?

क्या चुनाव आयोग की नियुक्ति को लेकर नया विवाद खड़ा होगा?

और क्या विपक्ष और सरकार कभी एकसाथ बैठकर इन सुधारों पर सहमति बना पाएँगे?

सत्य यह है कि चुनाव सुधार जैसे विषय पर टकराव नहीं, सहमति जरूरी है।
लोकतंत्र की मजबूती इसी में है।